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Monday, August 8

ये दिल बेचारा

तेरे बिना कुछ नहीं है इस जंहा में, तभी है तू इतना धड़कता
 ये तन भी तेरे बिना कुछ नहीं,तभी है तू इतना फडकता
 दुसरे की खुशियाँ देखकर तभी है तू इतना तडफता
 तू  होता सब के पास एक समान तो बम ,धमाके न मानव बम धधकता
 जालिम तेरे उपर है सारी जिमेदारी तभी है तू इतना अकड़ता
अगर तू होता इतना सीधा तो कोई भी आपस में नहीं झगड़ता
अगर तू न होता इस दुनिया में कोई भी अपना सीना न पकड़ता
काश तू न होता तो आज किसी को भी heart-attack से न मरना पड़ता
                                 

9 comments:

  1. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति पेश की है आपने!
    --
    कमेंट से वर्ड-वेरीफिकेसन हटा देंगे तो कमेंट करने में
    उलझन नही होगी किसी को भी!

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  2. दिल पर लिखी यह लाजबाब प्रस्तुति .....मन को भा गयी .....आशा है आपका लेखन यूँ ही अनवरत जारी रहेगा .....!

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  3. कृपया वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...

    वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
    डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो NO करें ..सेव करें ..बस हो गया .

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  4. बहुत ही अच्छा लिखा है!!

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  5. बहुत बढिया सुरेश जी आपने दिल का वर्णन किया है ! हमें उम्मीद है आगे भी हमें और अच्छी रचनाएं पढने को मिलेंगी

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  6. शास्त्री जी नमस्कार
    आप मेरे ब्लॉग पर आये मुझको पढ़ा और मेरी होंसला अफजाई की आपका बहुत-बहुत धन्यवाद्
    आशा करता हूँ की आगे भी आप मेरी हिम्मत बढ़ाते
    रहगें और हाँ वर्ड वेरिफिकेशन हटा दिया है

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  7. केवल जी मेरे ब्लॉग पर आने का बहुत -बहुत धन्यवाद्
    आपने मेरी गलती की तरफ ध्यान दिलाया इसका आपको तहे दिल से शुक्रिया केवल जी मै कोई प्रोफेशनल लेखख नहीं हूँ जो मन में आता है वो लिख देता हूँ उम्मीद करता हूँ की कोई भी गलती होगी आप जरुर ध्यान दिलाओगे
    आपको एक बार फिर धन्यवाद्

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  8. bahut sundar prastuti / badhai ho..

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