हम किस तरह खाएं पैसा ,ये हरगिज भुला सकते नहीं ,
हम सर तो झुका सकते हैं ,पर सर कटा सकते नहीं |
बड़ी ही सूझ- बुझ से मंहगाई हम बड़ा तो सकते हैं ,
जात धर्म के नाम पर सभी को लड़ा तो सकते हैं ,
देश चले या ना चले बड़े -बड़े कारखाने चला तो सकते हैं ,
चोरी ,ठगी ,बेईमानी हमारा हक़ है ,सबको बता तो सकते हैं |
बहुत कुछ समझ रही है अब जनता जूत्ते,चप्पल भी मारने लगी है ,
छोटी मोटी रैलियां कर -करके अब तो हमें ललकारने भी लगी है ,
चप्पल ,जूते तो ठीक है ,पर गोली हम खा सकते नहीं ,
हम सर तो झुका सकते हैं ,पर सर कटा सकते नहीं |
इस देश को आजाद कराने के लिए ,वीरों की घूमती थी टोलियाँ ,
सनकी थे वो जिन्होंने सीने पर खाई थी गोलियां ,
और हम तो ऐसे हैं ,देश की भी लगा सकते हैं बोलियाँ ,
सजा कोई नहीं दे सकता है हमें ,चाहे जिसकी भी उतारें चोलियाँ |
इस देश को करना है बर्बाद ,चाहे सरकार चला सकते नहीं ,
हम सर तो झुका सकते हैं ,पर सर कटा सकते नहीं |

