Click here for Myspace Layouts

Saturday, September 10

आज -कल

बढ़ी ख़ुशी की बात है, की हम लोग भारत देश में पैदा हुए जवान हुए शाद्दी  हुई और आज दो -दो जवान बेटो के बाप है |
मेरा बेटा बारहवी करने के बाद मुझको बोला की पापा जी अब क्या करूँ  मैंने कहा की बेटा आगे पढ़ और इंजीनियरिंग कर इसका आने वाले वक़्त में बहुत क्रेज है | तेरे बहुत काम आएगा बेटा बोला की पापा जी कोई ऐसा काम बताओ जिसमें अच्छा पैसा हो मैं वो ही काम करूँगा मैंने कहा की बेटा ये तो इन्सान  की काबलियत पर निर्भर है की कितना पढ़ा लिखा है ,उसने कौन सा बढ़िया कोर्स किया है ,वो कैसा काम करेगा उसी के हिसाब से उसको नौकरी मिलेगी और उसी के हिसाब से उसको तन्खवाह भी मिलेगी | बेटा बोला पापा जी मैंने नहीं करनी आगे पढाई मै तो ऐसी नौकरी चाहता हूँ , जिसमें सिर्फ और सिर्फ पैसा हो मैंने कहा की बेटा पैसा ही सब कुछ नहीं होता है ,पैसे के बिना भी इन्सान के पास बहुँत कुछ होता है बेटा बोला की २२ साल हो गये आपको नौकरी  करते हुए एक साइकिल तक तो खरीद नहीं सके | मैंने कहा बेटा ईमानदारी  से  इतनी महंगाई में घर का खर्च चल जाये ये क्या कम है बेटा बोला की आप मुझे कंही से भी पांच लाख का जुगाड़ कर दो नौकरी मै आपने आप लग जाउगां और आपके पैसे छ महीने मे वापिस कर दूंगा  | इस सरकार में लाखों नौकरियां है मुझे कोई न कोई मिल ही जाएगी मैंने कहा की बेटे आप रिश्वत देकर नौकरी लगोगे उसके बाद रिश्वत लोगे ,हेराफेरी करोगे ,बेईमानी करोगे और भर्ष्टाचार को फलाओगे नहीं बेटा नहीं मै ऐसा कभी भी नहीं होने दूंगा | अभी आप ने देखा नहीं अन्ना हजारे जी ने रामलीला मैदान पर कितने दिन तक अनशन रखा था खुद मै दो दिन तक वही पर था | आप ऐसा करो की आगे पढाई करो और खूब पढो तो आप को अच्छी नौकरी जरुर मिल जाएगी | बेटा बोला पापा जी आप एक बात बताओ क्या ऐसा करने से  भर्ष्टाचार  मिट जायेगा नहीं पापा जी कभी भी नहीं मिट सकता | आज कल हम लोगो को रिश्वत देने की और रिश्वत लेने की लत लग चुकी है | अगर कोई शरीफ कर्मचारी बिना रिश्वत के काम कर भी देता है तो हम लोग जबरदस्ती (अरे बाबु जी ले भी लो ये तो मिठाई है आपके लिए नहीं मै तो बच्चो  के लिए दे रहा हूँ ) दे देगा ,ये भर्ष्टाचार कभी नहीं मिट सकता चाहे कोई रामलीला मैदान पर अनशन करे या लाल किले पर पापा जी आप मेरी बात मान जाओ और मेरा काम  कर दो मै आपको सभी सुविधाएं दे दुगा और इधर मै आज के सारे हालात पर सोचकर और बेटे की बाते सुनकर असमझ की स्थिति में हूँ अब क्या करूँ?
मै उन हिन्दुस्तानी लोगो को सलाम करता हूँ जो विदेश में रहकर भी आपने देश को भूले नहीं है
.................................जय हिंद  ..............  

17 comments:

  1. मैंने कहा बेटा ईमानदारी से इतनी महंगाई में घर का खर्च चल जाये ये क्या कम है बेटा बोला की आप मुझे कंही से भी पांच लाख का जुगाड़ कर दो नौकरी मै आपने आप लग जाउगां और आपके पैसे छ महीने मे वापिस कर दूंगा इस सरकार में लाखों नौकरियां है मुझे कोई न कोई मिल ही जाएगी


    आपको बहुत बहुत बधाई --
    इस जबरदस्त प्रस्तुति पर ||

    ReplyDelete
  2. इस देश को रखना संम्भाल कर ईमानदार बन कर।
    सत्यानाश करना है तो चलो नेताओं के कदमों की नकल पर

    ReplyDelete
  3. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    ReplyDelete
  4. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  5. आज के हालात पर बहुत सटीक आलेख...

    ReplyDelete
  6. एक लाइलाज रोग का इलाज खोजने का प्रयास

    ReplyDelete
  7. वर्तमान परिवेश पर सटीक और सार्थक चिंतन

    ReplyDelete
  8. बहुत सही कहा आपने... आज - कल यही चल रहा है...

    पर इसके अलावा एक सुझाव देने चाहता हूँ, कृपया अन्यथा न लें।

    आपके लेख मे विराम चिन्हों की कमी महसूस हुई है मुझे और थोड़ी सी वर्तनी (spelling) मे भी गड़बड़ी है... शायद जल्दबाज़ी मे हो गया होगा। कृपया ध्यान रखें इन बातों का।

    ReplyDelete
  9. बहुत ही अच्छा लिखा है, आजकल के सन्दर्भ को दर्शाता.

    शुभकामनायें

    ReplyDelete
  10. हम लाये हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल कर ,
    इस देश को रखना मेरे बच्चों संभल कर।

    ReplyDelete
  11. aasan nhi bhrastachar ko khatm krna .
    pr hmen prayas krna hi hoga khaskr bachon ko smjhana hoga.

    ReplyDelete
  12. हकीकत बयान करती यह पोस्ट अच्छी लगी...शुभकामनायें !!

    ReplyDelete
  13. सही और सार्थक बात।

    ReplyDelete
  14. आपको बहुत बहुत बधाई --
    इस जबरदस्त प्रस्तुति पर ||

    ReplyDelete
  15. शायद यही वर्तमान हकीकत है ..जिसमे जीवन भी धुंधला महसूस होने लगता है ...सोचपरक लेख ...बहुत बधाई...

    ReplyDelete
  16. बेटे को बोला बेईमान की कोई कसम नही खाता, उस से कोई नही डरता, सब को पता हे साला बिकाऊ हे, इस लिये कोई उस की इज्जत भी नही करता, ओर उस के बच्चे भी आवारा ही निकलते हे, क्योकि जैसे बाढ का पानी अपने साथ बहुत सी बिमारियां ले कर आता हे वैसे ही हराम का पैसा भी बहुत सी गलत बाते अपने साथ लाता हे, जिस से एक पीढी नही आने वाली सारी पीढीयां नष्ट हो जाती हे, ओर ईमान दार आदमी को एक मिसाल के तोर पर माना जाता हे चाहे उस के पास पैसे ना हो लेकिन सब उस की इज्जत दिल से करते हे, उस की इमान्दारी की कसमे खाते हे, उस का परिवार चाहे फ़टे हाली मे रहे लेकिन प्यार ओर सुख उस परिवार मे ही मिलता हे..... ईमन दार को लोग दुर से देख कर इज्जत से सर झुका लेते हे.... इस देश मे बेईमानो की तो फ़ोज भरी पडी हे, लेकिन ईमानदार अलग चमक रखते हे.

    ReplyDelete